शनिवार, १७ नवम्बर २००७

मोहन दास करमचंद गांधी :


"मेरा अपना अनुभव है की मुसलमान क्रूर और हिंदु कायर होते है" मोपला और नोवाखली के दंगो में मुसलमानो द्वारा की गयी असंख्य हिंदुओं की हत्या वाली हिंसा को देखकर अहिंसा निति से मेरा वीचार बदल रहा है,

से लिया गया :- गांधी जी की जीवनी धनंजय कीर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीती श्री पुरुषोत्तम योग

1 टिप्पणियाँ:

Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…

इन्सानी भाईचारा और इस्लाम पर महात्मा गाधी का ब्यानः
‘‘कहा जाता है कि यूरोप वाले दक्षिणी अफ्रीका में इस्लाम के प्रसार से भयभीत हैं, उस इस्लाम से जिसने स्पेन को सभ्य बनाया, उस इस्लाम से जिसने मराकश तक रोशनी पहुँचाई और संसार को भाईचारे की इंजील पढाई। दक्षिणी अफ्रीका के यूरोपियन इस्लाम के फैलाव से बस इसलिए भयभीत हैं कि उनके अनुयायी गोरों के साथ कहीं समानता की माँग न कर बैठें। अगर ऐसा है तो उनका डरना ठीक ही है। यदि भाईचारा एक पाप है, यदि काली नस्लों की गोरों से बराबरी ही वह चीज है, जिससे वे डर रहे हैं, तो फिर (इस्लाम के प्रसार से) उनके डरने का कारण भी समझ में आ जाता है।’’
पृष्ठ 13, प्रो. के. एस. रामाकृष्णा राव की मधुर संदेश संगम, दिल्ली से छपी पुस्तक ‘‘इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) में

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